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4AM Thoughts
दुनिया से जंग लड़ते लड़ते कब खुदसे लड़ने लग गया, पता ही नहीं चला अब जब खुदसे लड़ रहा हूँ तो हर पल मैं हार रहा हूँ हार रहा हूँ मैं उस बीतें हुए कल से जिसमें मैंने बस सपने देखें उन सपनों के लिए कभी काम नहीं किया आज जब करने बैठा तो लग रहा है की कहीं मैं पीछे छूट गया जब खुदको खोजने बैठा तब मैं अपने सपनों के उजाले में ही अंधा हो गया आज भी मैं बस सपने देख रहा हूँ और बीते हुए कल को सोचके उदास हो रहा हूँ ||